Petrol Diesel Price Update : पेट्रोल और डीजल के दाम में आई भारी गिरावट जानिए आज के ताजा रेट।

सच बताऊं तो, कल ही मेरे एक दोस्त ने पेट्रोल पंप पर टैंक भरवाते हुए कहा, “भाई, अब तो बस यही दुआ करते हैं कि दाम और न बढ़े।” उसकी यह बात शायद हर उस शख्स की जुबान पर है जो रोज बाइक या कार चलाता है। पिछले कुछ सालों में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगे थे लेकिन फरवरी 2026 में आया यह अपडेट थोड़ी सांस लेने का मौका देता है। हालांकि, इसे ‘सस्ता’ कहना शायद जल्दबाजी होगी ‘स्थिर’ कहना ज्यादा ठीक रहेगा।

जयपुर में क्या है हाल और क्या यह सच में राहत है

जयपुर में पेट्रोल आज लगभग 105 रुपये प्रति लीटर के आसपास टिका हुआ है और डीजल 90 रुपये के करीब। मेरे हिसाब से, ये आंकड़े अभी भी उस आम आदमी के बजट पर भारी हैं जिसकी महीने की कमाई 20-25 हजार रुपये है। राहत सिर्फ इतनी है कि दाम अब रोज-रोज नहीं बढ़ रहे। यह ठहराव भी आज के दौर में एक उपलब्धि लगती है। क्या आपको नहीं लगता कि जब पेट्रोल 100 रुपये लीटर हो तो उसके ‘स्थिर’ रहने को ही हम राहत मानने लगते हैं।

यह ‘स्थिरता’ आखिर आई कहां से

दरअसल इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई गिरावट है। जब विदेश में तेल सस्ता होता है तो हमारे देश में भी इसका असर दिखता है। सरकार और तेल कंपनियों ने पिछले महीने 2 रुपये प्रति लीटर की जो कटौती की थी उसके बाद से दाम जमे हुए हैं। मेरी नजर में यह एक रणनीतिक कदम था ताकि लोगों में यह भरोसा बना रहे कि स्थिति नियंत्रण में है।

पर सिर्फ वाहन चालकों की ही बात नहीं है

यहां समझने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि पेट्रोल-डीजल के दाम सिर्फ आपकी बाइक या कार के टैंक से नहीं जुड़े। जब डीजल महंगा होता है तो ट्रक और ट्रैक्टर का खर्च बढ़ता है। और यह बढ़ा हुआ खर्च सीधा आपकी थाली में आने वाली सब्जी, दाल और फल की कीमत पर चढ़ जाता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों का स्थिर रहना पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। मेरे एक किसान रिश्तेदार का कहना है कि जब डीजल स्थिर रहता है, तो खेती के खर्च का अनुमान लगाना आसान हो जाता है।

तो क्या अब उम्मीद करनी चाहिए और राहत की

मेरी राय है कि हमें इस ‘स्थिरता’ को एक छोटी जीत के तौर पर जरूर देखना चाहिए लेकिन संतुष्ट होकर बैठना नहीं चाहिए। 105 रुपये लीटर पेट्रोल किसी भी नजरिए से ‘सस्ता’ नहीं है। आने वाले दिनों में सरकार पर यह दबाव बनाना जरूरी है कि वह टैक्स के ढांचे पर भी पुनर्विचार करे न कि सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार के भरोसे बैठी रहे। क्या हम एक ऐसी नीति की कल्पना नहीं कर सकते जहां ईंधन पर टैक्स एक तय सीमा से ऊपर न जाए क्योंकि जब तक पेट्रोल पंप पर जाकर आपका दिल नहीं दहलता तब तक असली राहत का मतलब नहीं निकलेगा। क्या आपको लगता है कि यह स्थिरता लंबे समय तक कायम रहेगी या फिर यह महज अगले बढ़ोतरी से पहले की शांति है।

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